Tuesday, 4 December 2012

अरक्षित वर्ग के साथ " छल"


आरक्षण के नाम पर हमारे अरक्षित वर्ग के लोगो के साथ समस्त सरकारे छल करती आई है, क्योंकि विद्या पाने के लिए  और जीवन में उन्नति के अवसर पाने के लिए जिस वातावरण  की आवश्यकता होती है, वह न देकर उन्हें कृतिम रूप से ऊपर उठाने का झूंठा प्रयास करती आई है. मेरा आरक्षण के समर्थक राजनेताओं से एक प्रश्न है कि क्या बाबा साहेब आंबेडकर आरक्षण के माध्यम से यशस्वी बने. जिन्हें भारत का जन जन संत शिरोमणि मानकर सम्मान करता है ऐसे बाल्मीकि, कबीर, रैदास जैसा एक बी संत क्या हमारी एक भी अविवेकी सरकार आरक्षण के माध्यम से पैदा कर सकी?  नहीं. क्योंकि प्रतिभा के विकास के लिए जिस स्वभाविक वातावरण  की आवश्यकता एक बालक को होती है, उसके निर्माण पर हमारी इन सरकारों ने कभी विचार नहीं किया. मेरा मानना है कि बुद्धि बाज़ार में मिलती होती तो सब बुद्धिमान होते.
ये छल नहीं तो और क्या है कि जिन सरकारों ने कृतिम रूप से बिना प्रतिभा के डाक्टरों, इंजिनीयरों, का निर्माण किया है. उन्ही सरकारों के प्रतिनिधि अपने ही द्वारा निर्मित इन डाक्टरों, इंजीनियरों की सेवाएँ लेने से कतराते है.और इसका कुप्रभाव इन्ही जातिओं के उन डाक्टरों, इंजीनियरों पर भी पड़ता है जो केवल अपनी प्रतिभा के दम पर आगे बढ़ते है. 
संविधान में जातीय आधार पर किये गए आरक्षण की व्यवस्था मात्र १० वर्ष के लिए की गयी थी, लेकिन वह आज भी जारी है. और आज़ादी के ६५ सालों के बाद भी आम दलित / आदिवासी की हालत में कोई बदलाव नहीं आया है. वे  वही काम करते आ रहे है.जो स्वतंत्रता के पहले से करते आ रहे थे. इस आरक्षण व्यवस्था से भला हुआ है तो कुछ व्यक्तिओं अथवा परिवारोंका. जिस व्यक्ति अथवा परिवार ने एक बार व्यवस्था का लाभ ले लिया वही इसका लाभ बार बार लेता आ रहा है क्योंकि आरक्षण की व्यवस्था जातीय आधार पर की गई है और जातियां नहीं बदलती
इनके सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के नाम पर जीतना पैसा इस देश की सरकारों ने किया है यदि उसे नगद बाँट दिया होता तो सारे डाली/ आदिवासी परिवार करोड़पति होते .     

                           आरक्षण हटाओ- देश बचाओ

वोट आपका है हथियार                               आरक्षण पर करदो वार
                   
                     -सवर्ण समाज पार्टी-

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