हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी , पंथ निरपेक्षी, लोक तंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा समस्त नागरिको को :-
सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय,
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म,
और उपासना की स्वतंत्रता,
प्रतिष्ठा और अवसर कि समता,
प्राप्त करने के लिए,
तथा उन सब से व्यक्ति कि गरिमा और
राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित
करने वाली बंधुता
बढ़ाने के लिए
दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज,
तारीख २६ नबम्बर , १९४९ ई. (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी,
संवत दो हज़ार छः विक्रमी) को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते है.
टिप्पणी
किसी अधिनियम अथवा संविधान की उद्देशिका (Preamble ) उन उद्देश्यों, मंतव्यो और लक्ष्यों को इंगित करती है, जो विधायक अथवा उसके निर्माता चाहते है. उसके आदर्शों, और आकाँक्षाओं को प्रतिबिम्बित करती है. निर्माताओं के आशय को जानने के लिए उद्देशिका एक मूल आधार है और लिखित संविधान प्राय: एक उद्देशिका द्वारा प्रक्कथित होता है, जिससे संविधान के मूल-स्वरुप का दिग्दर्शन होता है. भारतीय संविधान की उद्देशिका भी इस प्रकार, संविधान निर्माताओं के आदर्शों , उनकी आकाँक्षाओं और उनके मंतव्यो का अनुबोध कराती है.
लेकिन 26 जनवरी १९५० को लागू किये गए संविधान में अनुसूचित जातियों एवं जन जातिओं के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के नाम पर आरक्षण रुपी सुरसा का सृजन कर संविधान की उद्देशिका के विपरीत अवसर की समानता एवं बंधुता बढ़ाने के विचार को ख़त्म कर दिया. यह आरक्षण रुपी सुरसा आज़ादी ६५ सालों के बाद आज अपने विकरालतम रूप में देश की प्रतिभा रुपी हनुमानो को निगलने के लिए मूह फाड़े खड़ी है.
जातीय आधार पर किये गए आरक्षण से आज देश की एकता एवं अखंडता खतरे में है. देश आज वर्ग संघर्ष के चौराहे पर खड़ा है, लेकिन सत्ता के मद में चूर इन राजनेताओं एवं राजनैतिक दलों ने कभी विचार नहीं किया कि हमारे द्वारा दिन प्रतिदिन बढाई जा रही इस आरक्षण कि मात्र का लाभ कौन लेगा? इसके क्या दुष्परिणाम होंगे? अयोग्य लोगो को बढ़ावा देकर हम देश को किस ओर ले जाना चाह रहे है.?
आरक्षण हटाओ- देश बचाओ
वोट आपका है हथियार आरक्षण पर करदो बार
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